जीवन और परमेश्वर के बारे में सवालों का पता लगाने के लिए एक सुरक्षित जगह
जीवन और परमेश्वर के बारे में सवालों का पता लगाने के लिए एक सुरक्षित जगह
पसन्द  
साझा करें  

आप बाइबल पर विश्वास क्यों कर सकते हैं ?

बाइबल का इतिहास, उसकी रिपोर्टिव शैली, किसी भी दूसरे धार्मिक पाठ से अद्वितीय है।

बाइबल का इतिहास – बाइबल किसने लिखी ?

बाइबल 40 लेखकों के द्वारा 1500 साल पहले लिखी गई। दूसरे धार्मिक लेखों के बजाय बाइबल यथार्थ समाचारों, घटनाओं, स्थान, लोगों, उनकी बातचीत का विवरण देती है जो वास्तविक में घटित हुए। इतिहासकारों और पुरातत्ववेत्ताओं ने इनकी प्रमाणिकता को बार – बार स्वीकारा है।

लेखकों के लिखने के तरीके और उनके व्यक्तित्व का प्रयोग करते हुए, परमेश्वर ने हमें यह बताया है कि वह कौन है और उसे जानने का अनुभव कैसा है ?

बाइबल के 40 लेखक निरंतर एक ही प्रधान संदेश देते हैं: ईश्वर जिसने हमें रचा है हमारे साथ एक रिश्ता रखना चाहता है। वह हमें उसे जानने के लिए और उसपर विश्वास करने के लिए कहता है।

बाइबल हमें केवल प्रेरित ही नहीं करती बल्कि हमें जीवन और ईश्वर के बारे में बताती है। हो सकता है वह हमारे सभी प्रश्नों के उत्तर न दे पाए, पर जो हमारे मन में है, उसमें से वह काफी प्रश्नों के उत्तर दे सकती है। वह हमें बताती है कि किस प्रकार एक लक्ष्य और करूणा के साथ जिया जा सकता है। दूसरों से कैसे संबंध बनाया जा सकता है। यह हमें ईश्वर की शक्ति, मार्गदर्शन और हमारे प्रति उसके प्रेम का आनन्द लेने के लिए प्रोत्साहित करती है। बाइबल हमें यह भी बताती है कि किस प्रकार हम अनन्त जीवन प्राप्त कर सकते हैं।

प्रमाण के विभिन्न वर्ग बाइबल की ऎतिहासिक यथार्थता का समर्थन करते हैं और इसके साथ ही इसकी दिव्य ग्रंथकारिता का दावा भी करते हैं। ( यदि आप किसी खास शीर्षक को देखना चाहते हैं तो यहाँ पर लेख के उपशीर्षक दिए गए हैं। )

  1. पुरातत्वशास्त्र किस प्रकार बाइबल का समर्थन करता है ?
  2. समय के साथ क्या बाइबल बदल गई है या जो मूलतः लिखा गया था वह आज भी है ?
  3. क्या ईसामसीह क सुसमाचार खात वास्तविक ह ?
  4. ईसामसीह के बारे में जो बाइबल कहती है, क्या इतिहासकार उसकी पुष्टि करते हैं ?
  5. क्या बाइबल में विरोधाभास है ?
  6. नय टेस्टामन्ट की किताब कैसे निर्धारित की गईं ? यहूदा के सुसमाचारों को क्यों निर्धारित नहीं किया गया ?
  7. ईसामसीह के सुसमाचारों को लिखने म 30 से 60 साल क्यों लगे ?
  8. सुसमाचारों के अनुसार, वास्तव में ईसा ने जो कहा और किया, क्या उसका महत्व है ?

1. पुरातत्वशास्त्र किस प्रकार बाइबल का समर्थन करता है ?

पुरातत्वशास्त्र यह सिद्ध नहीं कर सकता है कि बाइबल हमारे लिए ईश्वर का लिखा हुआ शब्द है । फिर भी, पुरातत्वशास्त्र बाइबल की ऎतिहासिक यथार्थता की पुष्टि कर सकता है (और करता है ) पुरातत्वशास्त्रियों ने लगातार सरकारी अधिकारियों,राजाओं, शहरों, बाइबल में बताए गए त्योहारों की खोज की है – हालांकि कभी – कभी इतिहासकारों को लगा कि वे लोग और स्थान अस्तित्व में नहीं हैं। उदाहरणस्वरूप – जॉन के सुसमाचार बताते हैं कि ईसा ने एक अपंग की चिकित्सा बेथेस्डा के कुंड के बगल में की। पाठ में पाँच बरामदों ( रास्तों ) का भी वर्णन है जो कुंड की तरफ जाते थे। विद्वान नहीं मानते थे कि कुंड का कभी अस्तित्व था, जब तक कि पुरातत्ववेत्ताओं ने उसे जमीन से 40 फीट नीचे पाँच बरामदों समेत पूर्ण नहीं पाया।1

बाइबल में जबरदस्त मात्रा में ऎतिहासिक विवरण पाए गए हैं। कुछ ऎसे हैं जिनका विवरण बाइबल में है पर पुरातत्व शास्त्र उसे अभी तक खोज नहीं पाया है। हालांकि पुरातत्ववेत्ताओं की किसी भी खोज में और बाइबल के अभिलेखों में कहीं कोई मतभेद नहीं है।2

इसके विपरीत समाचारदाता ली स्ट्रोबेल “मार्मन की पुस्तक” पर टिप्पणी करते हैं। “ पुरातत्व शास्त्र बार –बार अपना दावा उन घटनाओं के बारे में, जो ऎसा माना जाता है बहुत समय पहले अमेरिका में हुई थीं, सिद्ध करने में असफल रहा है। मुझे याद है कि मैंने स्मिथ सोनियन इन्स्ट्यूट को यह जानने के लिए लिखा था कि मार्मनवाद के पक्ष में दावा करनेवालों का कोई सबूत है या नहीं ? स्पष्ट शर्तों में यह बताया गया कि उसके पुरातत्ववेत्ता नए संसार और पुस्तक की विषयवस्तु के बीच कोई सीधा संबंध नहीं देख पाए।” पुरातत्ववेत्ता शहर, लोग, नाम या जगहें जो कि “मार्मन की पुस्तक” में लिखी हैं कभी भी नहीं खोज पाए।3

बहुत सारी पुरानी जगहें जो कि लूका के द्वारा नय टेस्टामन्ट की बुक ऑफ ऎक्ट में बताई गई हैं, पुरातत्ववेत्ताओँ के द्वारा खोज ली गई हैं। “पूरी मिलाकर, लूका ने बत्तीस (32) देश, चौवन शहर (54) और नौ (9) द्वीप बिना गलती के बताए हैं।”4

पुरातत्व शास्त्र ने बाइबल के विषय़ में बहुत से गलत पाए गए सिद्धान्तों का खंडन किया है। जैसे – आज भी एक सिद्धान्त बहुत से कॉलेजों में पढ़ाया जाता है जो यह दावा करता है कि मूसा पेंटाट्यूक ( इंजील में बनाई मूसा की पाँच पुस्तकें) नहीं लिख सकते थे क्योंकि उनके समय में लिखाई की खोज नहीं हुई थी। फिर पुरातत्ववेत्ताओं ने काले दस्ते की खोज की। “उसके ऊपर कील के आकार के वर्ण थे और उसमें हम्बुराबी के विस्तृत नियम दर्ज थे। क्या वह मूसा के बाद का था ? नहीं ! वह पच्चीकारी से पहले का था ; केवल यही नहीं, वह अब्राहम से भी पहले का था (2000 ई. पूर्व) वह मूसा की लिखाई से कम से कम तीन शताब्दी पूर्वकालीन था।”5

पुरातत्व शास्त्र दृढ़ता से बाइबल की ऎतिहासिक यथार्थता की पुष्टि करता है।

आगे के अध्ययन के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए ताकि आप एक मानचित्र देख सकें जिसमें पुरातत्व शास्त्र की कुछ खोजों को सूचीकरण किया गया है।

2. समय के साथ क्या बाइबल बदल गई है या जो मूलतः लिखा गया था वह आज भी है ?

कुछ लोगों का यह मानना है कि बाइबल का अनुवाद “बहुत बार हुआ है” इसलिए वह अनुवाद के स्तरों पर दूषित हो गई है। पर यदि अनुवाद दूसरे अनुवादों से हुआ हो तो ऐसा संभव है, पर सभी अनुवाद सीधे मूल स्त्रोत पाठ, यूनानी, यहूदी भाषा, अरबी से हुए हैं जो हजारों प्राचीन पांडुलिपियों पर आधारित है। नय टेस्टामन्ट की यथार्थता की पुष्टि 1947 की एक पुरातत्व खोज, जो कि आज के इजराइल के पश्चिमी तट पर है, द्वारा होती है। “ द डेड सी स्क्रोल्स” में पुराने टेस्टामन्ट शास्त्र हैं जो कि किसी भी पांडुलिपि से, जो हमारे पास है, से 1000 साल पुरानी है। जो पांडुलिपि हमारे पास है उससे जब हम उनकी तुलना 1000 साल से पहले की पांडुलिपि से करते हैं तो देखते है दोनों 99.5% समय के साथ मेल खाती है। 5% का जो अंतर है वह वर्तनी और वाक्यों की अशुद्धियों के कारण है पर उससे वाक्यों के अर्थ में कोई अंतर नहीँ पड़ा है।

नय टेस्टामन्ट मानवता का सबसे प्राचीन और विश्वसनीय लेख है। हमारे पास नय टेस्टामन्ट की हजारों प्रतियाँ हैं। सभी की तारीख मूल लेख के बहुत समीप है। बल्कि हम ज्यादा ही निश्चिन्त हैं कि नय टेस्टामन्ट वैसा ही है जैसा कि इसके लेखकों ने इसे मूलतः लिखा था। हम उसी तरह निश्चित हैं जैसा कि हम प्लैटो, अस्तु या होमर की इलियट रचना के लिए उन्हें विशेषता प्रदान करते हैँ।

नय टेस्टामन्ट की तुलना दूसरे प्राचीन लेखों से करने के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए।

3. क्या ईसामसीह के सुसमाचार खाते वास्तविक हैं ?

नय टेस्टामन्ट के चारों लेखकों ने ईसा के जीवन पर खुद जीवनी लिखी है। इन्हे ईसा के चार सुसमाचार कहा जाता है। ये नय टेस्टामन्ट पर पहली चार किताबें हैं। हम निश्चित कैसे हो सकते हैं कि ईसा की यह जीवनी बिल्कुल सही है ?

जब इतिहासकार यह निर्धारित करने का प्रयास करते हैं कि एक जीवनी विश्वसनीय है,वे पूछते हैं, “उस व्यक्ति के विषय में उसी विवरण के साथ कितनी स्त्रोत रिपोर्ट्स हैं ?” इतिहासकार इसी तरह काम करते हैं। कल्पना कीजिए आप जॉन एफ कैनेडी के बारे में जीवनी एकत्रित कर रहे हैं। आप पाएँगे कि बहुतों ने उनके परिवार के बारे में, उनके राष्ट्रपति होने के समय के बारे में, उन्होंने क्यूबा की मिसाइल आपातकाल स्थिति को किस प्रकार सुलझाया आदि का एक सा जीवनी विवरण दिय़ा है। पर आपको एक जीवनी मिले जो सबसे अलग हो और यह कहती हो कि उन्होंने दक्षिणी अफ्रिका में दस साल एक पादरी की तरह गुजारे। दूसरी जीवनी कहती है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन अमेरिका में व्यतीत किया। एक कुशल इतिहासकार उन्हीं विवरण को मानेगा जिसपर सभी का एक मत है। ईसा के विषय में क्या हमें अनेक जीवनियाँ मिली हैं जो उनके बारे में समान तथ्य बताती हैं? जी हाँ, यहाँ पर ईसा के तथ्यों को चुना गया है और वे तथ्य उनकी हर जीवनी में पाए गए हैं।

  मत्ती मरकुस लूका यूहन्ना
ईसा एक कुँवारी से पैदा हुए। 1:18-25 - 1:27, 34 -
वह बेथलहेम मे पैदा हुए। 2:1 - 2:4 -
वह नाजरेथ में रहते थे। 2:23 1:9, 24 2:51, 4:16 1:45, 46
ईसा को जॉन द बैपटिस्ट द्वारा बैपटाइज किया गया।   3:1-15 1:4-9 3:1-22 -
उन्होंने लोगों को चंगा करने के चमत्कार दिखाए। 4:24, etc. 1:34, etc. 4:40, etc. 9:7
वह पानी पर चले। 14:25 6:48 - 6:19
उन्होंने 5 रोटियों और 2 मछलियों से
5हजार लोगों को खाना खिलाया।
14:7 6:38 9:13 6:9
ईसा ने आम आदमियों को शिक्षा दी। 5:1 4:25, 7:28 9:11 18:20
समाज के उपेक्षित लोगों के साथ समय बिताया। 9:10, 21:31 2:15, 16 5:29, 7:29 8:3
उन्होंने धार्मिक अभिजात वर्ग के साथ तर्क किया। 15:7 7:6 12:56 8:1-58
धार्मिक अभिजात वर्ग ने उन्हें मारने का षड़यन्त्र किया। 12:14 3:6 19:47 11:45-57
उन्होंने ईसा को रोमवासियों के हवाले कर दिया।   27:1, 2 15:1 23:1 18:28
ईसा को कोड़े मारे गए। 27:26 15:15 - 19:1
उन्हें फाँसी पर चढ़ा दिया गया। 27:26-50 15:22-37 23:33-46 19:16-30
उन्हें कब्र में दफनाया गया। 27:57-61 15:43-47 23:50-55 19:38-42
ईसा मरकर फिर से जीवित हुए और
अपने अनुयायियों को दिखायी दिए।
28:1-20 16:1-20 24:1-53 20:1-31

दो जीवनी - सुसमाचार जो कि ईसाई धर्मप्रचार मत्ती और यूहन्ना ने लिखे हैं,जो ईसा को व्यक्तिगत रूप से जानते थे और उन्होंने उनके साथ तीन साल तक देशाटन किया। दूसरी दो किताबें मरकुस और लूका ने लिखी है जो बाकी धर्मप्रचारकों के करीबी सहयोगी थे। इन लेखकों ने तथ्यों को सीधे देखा और जाना था जो वे लिख रहे थे। आरंभिक गिरजाघरों ने इन चारों सुसमाचारों को स्वीकार किया क्योंकि ईसा के जीवन की ये जानकारी आम जानकारी थी। इसके अलावा, ईसा के सुसमाचार समाचार रिपोर्ट की तरह पढ़े जा सकते थे। प्रत्येक दैनिक घटनाओं का स्वयं के दृष्टिकोण से तथ्यात्मक लेखा किया गया था। हर लेखक के लिए उनका विवरण अद्वितीय था, पर तथ्य सभी को स्वीकार थे, पर ईसा के सुसमाचार विशिष्ट भौगोलिक नाम और सांस्कृतिक विवरण देते हैं जिनकी बाद में इतिहासकारों और पुरातत्ववेत्ताओं ने पुष्टि की।

ईसा के किसी एक सुसमाचार के नमूने को देखने के लिए, यहाँ क्लिक कीजिए

4. ईसामसीह के बारे में जो बाइबल कहती है, क्या इतिहासकार उसकी पुष्टि करते हैं ?

बाइबल विवरण देती है कि नाजरेथ के ईसा ने बहुत से चमत्कार किए, रोमियो के द्वारा उन्हें शूली पर चढ़ाया गया और मरने के बाद वे पुनः जीवित हो गए। कई पुराने इतिहासकारों ने ईसा के जीवन और उनके अनुयायियों के बारे में बाइबल के लेख की पुष्टि की है।

कोरनेलियस टेसिटस (ए.डी. 55-120) रोम के प्रथम शताब्दी के इतिहासकार को पुरातन विश्व का एक सटीक इतिहासकार माना जाता है।6 टेसिटस का एक अंश यह बताता है कि रोम के सम्राट नीरो ने “ ईसाई कहे जानेवाले वर्ग पर उत्तम किस्म के अत्याचार द्वारा चोट पहुँचाई। ---- क्रिस्टस ( ईसामसीह ), को जिससे इस नाम की उत्पत्ति हुई, टाइबेरियस के शासनकाल में, हमारे एक मुख्तार पिलातुस के हाथों अत्यधिक कड़ी सजा का सामना करना पड़ा। ------ ”7

फ्लेवियस जोसेफस, एक यहूदी इतिहासकार (ए.डी. 38 – 100 ) ने अपने यहूदी पुरावशेषों में ईसामसीह के बारे में लिखा है,” हमें पता चला है कि ईसामसीह एक ज्ञानी मनुष्य थे जिन्होंने आश्चर्यजनक कारनामें किये, बहुतों को पढ़ाया, यहूदी और यूनानियों में से बहुत से अनुयायी बनाए, जिसे मसीहा समझा गया उनपर यहूदी नेताओं ने आरोप लगाए, उनकी निन्दा की और पिलातुस द्वारा उन्हें शूली पर चढ़ाया गया और यह माना गया कि वे पुनर्जीवित हुए।”8

सूटोनियस, युवा प्लिनी और थैलस ने भी ईसाइयों की पूजा और अत्याचारों के बारे में जो लिखा है वह नए टेस्टमैंट के खातों के अनुरूप है।

यहाँ तक कि यहूदी तल्मूड जो निश्चित रूप से ईसामसीह के प्रति पक्षपाती नहीं है, उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं से इत्तफाक करता है। तल्मूड में लिखा है,“ हमें पता चला है कि ईसामसीह वैवाहिक रिश्ते के पश्चात् पैदा हुए, शिष्यों को जमा किया, अपने विषय में निन्दात्मक दावे किए और चमत्कार दिखाए, पर इन चमत्कारों को ईश्वर के लिए नहीं बल्कि जादू टोने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।”9

यह जानते हुए कि अधिकांश प्राचीन इतिहासकार राजनीति और सैन्य नेताओं पर ध्यान केंद्रित करते थे, न कि रोमन साम्राज्य के दूरस्थ प्रांतों के अव्यक्त रबियों के लिए, यह एक उल्लेखनीय जानकारी है। प्राचीन इतिहासकार ( यहूदी, यूनानी और रोमन) नए टेस्टमैंट की प्रमुख घटनाओं की पुष्टि करते हैं, हालांकि वे खुद उसपर विश्वास नहीं करते हैं।

5. क्या बाइबल में विरोधाभास है?

कुछ लोग यह दावा करते हैं कि बाइबल विरोधाभासों से भरी है, पर यह सत्य नहीं है। बाइबल के आकार और दायरे को देखते हुए, वास्तव में स्पष्ट विरोधाभासों की संख्या बहुत छोटी है। जो स्पष्ट विसंगतियाँ दिखाई देती हैं वे आपदा के बजाय जिज्ञासा का कारण ज्यादा है। वे किसी प्रमुख घटना या विश्वास के लेख का उलंघन नहीं करती हैं।

यहाँ पर तथाकथित विरोधाभास का एक उदाहरण दिया गया है। पिलातुस ने एक निशानी जहाँ ईसामसीह को शूली पर चढाया गया था, लगाने की आज्ञा दी थी। ईसा के तीन सुसमाचार खाते बताते हैं कि उस निशानी पर क्या लिखा था :
     मत्ती में: “यह ईसामसीह है, यहूदियों का राजा ”
     मरकुस में: “यहूदियों का राजा”
     यूहन्ना में: “नाजरथ का ईसामसीह, यहूदियों का राजा”

शब्द अलग हैं, फिर भी स्पष्ट विरोधाभास है। पर उल्लेखनीय बात यह है कि तीनों लेखकों ने एक ही घटना को विस्तार से वर्णित किया है –- ईसा को शूली पर चढ़ाया गया। इसपर सभी सहमत हैं। उनके खाते में यह भी दर्ज है कि शूली पर एक निशानी रखी गई थी और उस निशानी का अर्थ तीनों खातों में एक है।

सटीक शब्दों का क्या ? सुसमाचार की मूल यूनानी में, वे संदर्भ चिह्न का प्रयोग नहीं करते थे जैसा कि आज हम प्रत्यक्ष संदर्भ का संकेत देने के लिए करते हैं। सुसमाचार के लेखक अप्रत्यक्ष संदर्भ का प्रयोग करते थे जिसके कारण अंशों में सूक्ष्म भिन्नता दिखती है।

यहाँ पर तथाकथित विरोधाभास का एक और उदाहरण दिया गया है। अपने पुनर्जीवित होने से पहले ईसा क्या कब्र में दो दिन थे या तीन दिन? ईसा ने शूली पर चढ़ने से पहले कहा था, “ यूनुस तीन रात दिन जल-जन्तु के पेट में रहा, वैसे ही मनुष्य का पुत्र तीन रात दिन पृथ्वी के भीतर रहेगा। ”( मत्ती 12:40) मरकुस ने ईसा का दूसरा कथन लिखा, “ देखो, हम यरूशलेम को जाते हैं, और मनुष्य का पुत्र महायाजकों और शास्त्रियों के हाथ पकड़वाया जाएगा, और वे उस को घात के योग्य ठहराएंगे, और अन्यजातियों के हाथ में सौंपेंगे। वे उस को ठट्ठों में उड़ाएंगे, और उस पर थूकेंगे, और उसे कोड़े मारेंगे, और उसे घात करेंगे, और तीन दिन के बाद वह जी उठेगा॥ ”(मरकुस10:33,34)

ईसा को शुक्रवार को मारा गया था और उन्हें रविवार को पुनर्जीवित पाया गया। अतः कब्र में तीन दिन और रात कैसे हो सकते हैं? ईसा के समय में दिन और रात के किसी भी भाग को यहूदी भाषा के आँकड़े में पूरा दिन और पूरी रात गिना जाता था। अतः शुक्रवार, शनिवार और रविवार को ईसा की भाषा में तीन दिन और तीन रात कहा गया। आज भी हम उसी तरह से बात करते हैं – यदि एक व्यक्ति को कहना है, मैंने पूरा दिन खरीददारी करने में बिताया। हम समझ जाते हैं कि वह व्यक्ति 24 घंटों की बात नहीं कर रहा है।

नय टेस्टामन्ट में स्पष्ट विरोधाभास का यह ठेठ नमूना है। संदर्भ का सूक्ष्म परीक्षण करके या उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करके ज्यादातर विरोधाभासों को सुलझा लिया गया है।

6. नय टेस्टामन्ट की किताबें कैसे निर्धारित की गईं ? यहूदा के एपोक्रिफा या थॉमस के सुसमाचारों को क्यों निर्धारित नहीं किया गया ?

नय टेस्टामन्ट की आज की किताबों की सूची पर विश्वास करने के कई ठोस कारण हैं। जैसे ही किताबों को लिखा गया, गिरजाघर ने नय टेस्टामन्ट की किताबों को स्वीकार किया। उनके लेखक ईसा मसीह के मित्र थे या उनके नजदीकी अनुयायी थे। वे वैसे व्यक्ति थे जिन्हे ईसा ने पूर्वकालीन चर्च के नेतृत्व का भार सौंपा था। सुसमाचारों के लेखक मत्ती और यूहन्ना ईसा के सबसे नजदीकी अनुयायी थे। मरकुस और य़ूहन्ना प्रेरितों के सहचर थे, जो ईसा के जीवन के बारे में जानने के लिए प्रेरितों के खातों का उपयोग कर सकते थे।

दूसरे नय टेस्टामन्ट के लेखक भी तुरंत ईसा तक पहुँच सकते थे। याकूब और यहूदा ईसा के सौतेले भाई थे जो प्रारंभ में उनपर विश्वास नहीं करते थे। पतरस 12 प्रेरितों में से एक था। शुरू में पॉल ईसाई धर्म का हिंसक प्रतिद्वंदी था और धार्मिक शोषित वर्ग का एक सदस्य था। पर बाद में वह ईसा का एक उत्साही अनुयायी बन गया। वह इससे सहमत था कि ईसा मरकर पुनर्जीवित हुए।

नय टेस्टामन्ट की किताबों में लिखी गई रिपोर्ट उन बातों से मेल खाती थीं जिसके हजारों लोग चश्मदीद गवाह थे। बाद में जब दूसरी किताबें कई सौ साल बाद लिखी गईं, तब चर्च के लिए यह मुश्किल नहीं था कि जालसाजियों के रूप में उन्हें पकड़ सकें। उदाहरणस्वरूप यहूदा का सुसमाचार नोस्टिक संप्रदाय के द्वारा करीब 130-170 ए.डी में यहूदा की मृत्यु के बहुत बाद लिखा गया था। थॉमस का सुसमाचार, करीब 140 ए.डी.में लिखा गया एक जाली लेखन था जो गलती से एक प्रेरित के नाम पर था। इन सभी में और नोस्टिक (आत्मज्ञानी) सुसमाचारों में ईसा की जानी मानी शिक्षाओं और पुराने टेस्टामेंट को लेकर टकराव होता था और अक्सर उनमें निहित अनेक ऐतिहासिक और भौगोलिक गलतियाँ दिखाई देती थीँ।10

367 ए.डी. में अथेन्सियस ने औपचारिक रूप से 27 नय टेस्टामेंट की किताबें सूचीबद्ध की। ( वही सूची आज भी मान्य है) इसके तुरंत बाद, जेरोम और ऑगस्टीन ने यही सूची प्रसारित की। ये सूचियाँ, हालांकि, अधिकांश ईसाइयों के लिए जरूरी नहीं थीं, सामन्यतः कुल मिलाकर पूरे चर्च ने उसे स्वीकारा और उसी पुस्तकों की सूची का ईसा की मृत्यु के बाद पहली सदी से इस्तेमाल हुआ। जैसे –जैसे चर्च यूनानी भाषा बोलनेवालों प्रांतों से परे बढ़ता गया और तब इंजील के अनुवाद की आवश्यकता महसूस हुई। ज्यों – ज्यों किरच संप्रदाय का अपनी प्रतिस्पर्धात्मक पवित्र पुस्तकें लेकर उभरना जारी रहा, यह आवश्यक हो गया कि पुस्तकों की एक निश्चित सूची हो।

7. नय टेस्टामेंट में ईसामसीह के सुसमाचारों को लिखने में 30 से 60 साल क्यों लगे ?

ईसामसीह की मृत्यु और पुनर्जीवन के बाद सुसमाचार खाते तुरंत नहीं लिखे गए। उसका मुख्य कारण था कि उस समय उन लेखों की प्रत्यक्ष जरूरत नहीं थी। येरूशलम में सुसमाचार मुँह के वचन के द्वारा फैल गए। ईसा के जीवन के बारे में लिखित खाते की जरूरत नहीं समझी गई क्योंकि जो येरूशलम प्रांत में थे वे ईसा के चश्मदीद गवाह थे और ईसा के मंत्रालय से जागरूक थे।11

जब ईसा का सुसमाचार जेरूसलम से परे फैला, तब आसानी से उनके चश्मदीद गवाहों को ढूँढ़ना सरल नहीं था, अतः उस समय लिखित खातों की जरूरत महसूस हुई ताकि दूसरों को ईसा के जीवन और उनके मंत्रालय के बारे में अवगत कराया जा सके। बहुत से विद्वानों ने लिखे हुए सुसमाचारों को ईसा की मृत्यु के 30 और 60 साल के बीच की तिथि प्रदान की।

लूका ने अपने सुसमाचार के आरंभ में बताया कि उसने उसे क्यों लिखा, “बहुतों ने उन बातों को जो हमारे बीच में होती हैं इतिहास लिखने में हाथ लगाया है। जैसे कि उन्होंने जो पहिले ही से इन बातों के देखने वाले और वचन के सेवक थे हम तक पहुंचाया। इसलिये हे श्रीमान थियुफिलुस मुझे भी यह उचित मालूम हुआ कि उन सब बातों का सम्पूर्ण हाल आरम्भ से ठीक ठीक जांच करके उन्हें तेरे लिये क्रमानुसार लिखूं। ”12

अगर आप ईसा के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं,यह लेख उनके जीवन का सारांश बताएगा; अंधविश्वास से परे

8. सुसमाचारों के अनुसार, वास्तव में ईसा ने जो कहा और किया, क्या उसका महत्व है ?

जी हाँ, विश्वास के महत्वपूर्ण होने के लिए उसका यथार्थता और तथ्यों पर आधारित होना जरूरी है। यहाँ क्यों, का उत्तर है। अगर आप लंदन के लिए उड़ान भर रहे हैं तो आपको विश्वास रखना होगा कि उसमें जरूरत के अनुसार ईंधन है और उसका यंत्र सही है, उसका विमानचालक प्रशिक्षित है और विमान पर कोई आतंकवादी नहीं है। आपका विश्वास, वह नहीं है जो आपको लंदन ले जा रहा है बल्कि आपका विश्वास आपको हवाईजहाज में चढाने में लाभप्रद है। आपको वास्तव में जो लंदन ले जा रहा है, वह है विमान की, विमानचालक आदि की सत्यनिष्ठता। भूतकाल में हुई उड़ानों के सकारात्मक अनुभव के आधार पर आप उन पर भरोसा कर सकते हैं। पर आपका सकारात्मक अनुभव विमान को लंदन ले जाने के लिए काफी नहीं है।जो मायने रखता है, वह है, आपके विश्वास का मुददा – क्या यह विश्वसनीय है ?

क्या नय टेस्टामेंट ईसा की एक सटीक, विश्वसनीय प्रस्तुति है ? जी हाँ, हम नय टेस्टामेंट पर विश्वास कर सकते हैं क्योंकि उसे भारी तथ्यात्मक समर्थन प्राप्त है। यह लेख निम्नांकित बिन्दुओं को छूता है : इतिहासकारों का एकमत होना, पुरातत्व शास्त्र का एकमत होना, चारों सुसमाचार जीवनी का सहमत होना, दस्तावेजों का उल्लेखनीय परिरक्षण, अनुवाद में बेहतर सटीकता। ये सारी बातें जो हमने आज पढ़ी हैं, वही मूल लेखकों ने लिखी हैं और वास्तविक जीवन, वास्तविक जगहों में इसका अनुभव किया है हमारे विश्वास को यह ठोस आधार देती हैं।

यूहन्ना, लेखकों में से एक हैं जो उसे भली – भाँति जोड़ते हैं , “ यीशु ने और भी बहुत चिन्ह चेलों के सामने दिखाए, जो इस पुस्तक में लिखे नहीं गए। परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ॥”13

 मेरा एक सवाल है ...
 परमेश्वर के साथ एक रिश्ता शुरू कैसे किया जाए

(1) स्ट्रोबेल, ली द केस फॉर क्राइस्ट( जोन्डरवन पब्लिशंग हाउस,1998), पृष्ठ 132
(2) सुप्रसिद्ध यहूदी पुरातत्ववेत्ता, नेलसन ग्लूएक,लिखते हैं,” निःसंदेह यह वर्णित किया गया है किसी भी पुरातत्व शास्त्र की खोज ने कभी भी किसी बाइबल के संदर्भ का प्रतिवाद नहीं किया।”मैक्डोवेल,जोश
(3) स्ट्रोबेल, पृष्ठ 143 – 144
(4) गिस्लर,नॉर्मन एल बेकर इनसाइक्लोपीडिया ऑफ क्रिस्टियन अपोलोजेटिक्स( ग्रैण्ड रैपिड्स: बेकर,1998)
(5) मैक्डोवेल,जोश इविडेन्स दैट डिमान्ड्स ए वरडिक्ट( 1972), पृष्ठ 19.
(6) मैक्डोवेल,जोश द न्यू इविडेन्स दैट डिमान्ड्स ए वरडिक्ट( थॉमस नेलसन पब्लिशर्स, 1999), पृष्ठ 55.
(7) टेसिटस, ए.15.44.
(8) विल्किन्स, माइकेल जे. एण्ड मोरलैण्ड, जे .पी. जीसस अंडर फायर (जोन्डरवन पब्लिशंग हाउस,1995), पृष्ठ 40
(9) विल्किन्स, माइकेल जे. एण्ड मोरलैण्ड, जे .पी. जीसस अंडर फायर (जोन्डरवन पब्लिशंग हाउस,1995), पृष्ठ 40
(10) ब्रूस, एफ. एफ. द बुक्स एण्ड द पार्चमेन्ट्स: हाउ वी गॉट आवर इंगलिश बाइबल( फ्लेमिंग एच. रेवेल कंपनी,1950), पृष्ठ 113
(11) देखिए प्रेरितों के काम 2:22,3:13,4:13,5:30,5:42,6:14 आदि
(12) लूका 1:1–3
(13) यूहन्ना 20:30,31

दूसरों केसाथ बाँटिए  

TOP