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अंधविश्वास से परे

क्या ईसा मसीह ईश्वर हैं ? क्या ईसा मसीह ने कभी भी ईश्वर होने का दावा किया है ? ईसा मसीह के जीवन से मिलनेवाले प्रमाण देखकर जानिए कि क्यों ईसा मसीह पर विश्वास करना अंधविश्वास नहीं है।

पॉल ई लिट्ल द्वारा

हमारे लिए अंतिम तौर पर यह जानना असंभव है कि क्या ईश्वर का अस्तित्व है और वह किस प्रकार का है जब तक ईश्वर स्वयं पहल नहीं करता और अपने आप को प्रकट नहीं करता।

ईश्वर के रहस्योद्घाटन का कोई सुराग ढ़ूँढने के लिए हमें इतिहास के पन्नों पर दृष्टि डालनी होगी। इसका एक स्पष्ट चिह्न है। 2000 साल पहले ,पैलेस्टाइन के एक अव्यस्त गाँव के अस्तबल में, एक बच्चे का जन्म हुआ। पूरा संसार एक शुभ कारण के लिए आज भी ईसा मसीह के जन्मदिन का उत्सव मना रहा है।

क्या ईसा मसीह ईश्वर हैं ? क्या ईसा मसीह ने कभी भी ईश्वर होने का दावा किया है ?

हमें बताया गया है कि आम आदमी उसकी बातों को खुशी से सुनते थे और “ वह उन के शास्त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी की नाईं उन्हें उपदेश देता था ॥”1

और जल्दी ही यह स्पष्ट हो गया, हालांकि वह अपने बारे में बहुत ही चौकानेवाला और चमत्कारिक बयान दे रहा था। उसने अपने आप को विलक्षण शिक्षक और पैगंबर से ज्यादा महान बताया। उसने साफ शब्दों में कहा कि वह ईश्वर है। उसने अपनी शिक्षा में अपनी पहचान को मुख्य मुद्दा बनाया। उसके जो अनुयायी थे, उस ने उन से कहा; “परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो ?” तब शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।2 यह सुनकर ईसा मसीह हैरान नहीं हुआ, न ही उसने पतरस को डाँटा। उसके विपरीत ईसा ने उसे आदेश दिया।

ईसा मसीह अक्सर मेरे पिता कहकर संबोधित करते थे और उनके सुननेवालों पर उनके शब्दों का पूरा प्रभाव पड़ता था। हमें कहा गया था,“ इस कारण यहूदी और भी अधिक उसके मार डालने का प्रयत्न करने लगे, कि वह न केवल सब्त के दिन की विधि को तोड़ता, परन्तु परमेश्वर को अपना पिता कह कर, अपने आप को परमेश्वर के तुल्य ठहराता था॥3

एक दूसरे अवसर पर उन्होंने कहा मैं और मेरे पिता एक हैं। उसी समय यहूदियों ने उसे पत्थर मारना चाहा। ईसा मसीह ने उनसे पूछा कि उसके किस अच्छे काम ने उन्हें ईसा मसीह को पत्थर मारने के लिए प्रेरित किया है ? उन लोगों ने उत्तर दिया, “भले काम के लिये हम तुझे पत्थरवाह नहीं करते, परन्तु परमेश्वर की निन्दा के कारण और इसलिये कि तू मनुष्य होकर अपने आप को परमेश्वर बनाता है।4

क्या ईसा मसीह ईश्वर हैं ? उनके जीवन पर एक नजर डालें।

जब एक लकवा मारा हुआ व्यक्ति छत से उतारा गया ताकि वह ईसा के द्वारा चंगा हो सके,यीशु ने कहा, पुत्र, तुम्हारे पापों ने तुम्हे क्षमा कर दिया है। यह सुनकर धार्मिक गुरुओं ने तुरंत प्रतिक्रया व्यक्त की कि यह व्यक्ति इस तरह की बातें क्यों कर रहा है ? वह तिरस्कार कर रहा है। केवल परमेश्वर के सिवा, कौन पापों के लिए क्षमा कर सकता है ?

जब ईसा मसीह को उनके जीवन के लिए जाँचा जा रहा था, तब महायाजक ने ईसा मसीह से सीधा सवाल किया, क्या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है ?

यीशु ने कहा; हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।

तब महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़कर कहा; अब हमें गवाहों का और क्या प्रयोजन है, तुम ने यह निन्दा सुनी5

ईसा मसीह का संपर्क ईश्वर से इतना गहरा था कि वह एक मनुष्य के मनोभावों को अपने और ईश्वर के प्रति समान कर देता था। अतः उसे जानना प्रभु को जानना था6 उसे देखना प्रभु को देखना था7 उसपर विश्वास करना प्रभु पर विश्वास करना था8 उसे ग्रहण करना प्रभु को ग्रहण करना था9 उससे बैर रखना प्रभु से बैर रखना था10 उसका आदर करना प्रभु का आदर करना था11

क्या ईसा मसीह ईश्वर हैं ? संभावित विवेचना

प्रश्न यह है कि क्या वह सच बोल रहा था ?

संभवतः ईसा ने झूठ बोला जब उसने अपने आप को ईश्वर कहा। हो सकता है कि वह जानता था कि वह ईश्वर नहीं है, जानबूझकर उसने अपने सुननेवालों को धोखा दिया ताकि अपने शिक्षण को एक प्राधिकार दे सकें। कुछ लोग ऎसा सोचते हैं। जो लोग उसे अपना ईश्वर नहीं मानते, यह मानते हैं कि वह एक महान नैतिक शिक्षक था। लेकिन वे इसे समझने में असफल रहे हैं कि दोनों बयान परस्पर विरोधी हैं। ईसा मसीह शायद ही एक महान नैतिक शिक्षक था। अगर, उसकी शिक्षाओं का सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु – उसकी पहचान – है तो वह इच्छित झूठा था। दूसरी संभावना यह है कि ईसा मसीह ईमानदार था पर स्वयं को धोखा दे रहा था। हमारे पास आज एक आदमी का नाम है जो यह सोचता है कि वह ईश्वर है। मानसिक रूप से विकलांग ?

जब हम ईसा मसीह के दावों को देखते हैं तो केवल चार संभावनाएँ दिखाई देती हैं। या तो वह झूठा हैं, या मानसिक रूप से बीमार हैं, वह एक दिव्य चरित्र हैं या फिर सत्य हैं।

पर जब हम ईसा मसीह के जीवन की ओर देखते हैं तो हमें असामान्यता और असंतुलन, जो कि एक मानसिक रोगी में होता है, का कोई प्रमाण नहीं मिलता, बल्कि महान रचयिता हमें दबाव में दिखाई देता है। एक तीसरा विकल्प यह है कि उसके उत्साही अनुयाय़ियों ने उसके मुँह में शब्द डाले जिसे सुनकर वह चौंक गया। अगर ईसा को वापस जाना था,वह तुरन्त उन्हें अस्वीकार कर देता। इस सिद्धान्त का आधुनिक पुरातत्व शास्त्र द्वारा महत्वपूर्ण तरीके से खंडन किया गया। ईसा की चार आत्मकथाएँ उसके जीवनकाल में उन लोगों द्वारा लिखी गई जिन्होंने उसे देखा,सुना और उसका अनुसरण किया। ये विशिष्ट तथ्य और उनका वर्णन इंजील खातों में दर्ज है जिसकी पुष्टि उन लोगों ने की है जो ईसा के प्रत्यक्ष साक्षी हैं। मत्ती, मरकुस, लूका और यूहन्ना द्वारा इंजील की तिथि निर्धारण ने काल्पनिक ज्ञान संबंधी सुसमाचार के विपरीत, जो कई सदियों के बाद छपा, उसने इसलिए इतना प्रभाव और प्रसारण प्राप्त किया।

ईसा मसीह न तो झूठा था और न ही मानसिक रूप से विकलांग। उसे ऐतिहासिक सच्चाई से अलग नहीं बनाया गया था। केवल एक दूसरा विकल्प यह हो सकता है कि ईसा मसीह चेतन रूप से सच्चा था जब उसने यह कहा कि वह ईश्वर है।

क्या ईसा मसीह ईश्वर हैं ? इसका क्या सबूत है ?

एक बिन्दु पर आकर दावे ज्यादा महत्व नहीं रखते। बातें सस्ती होती हैं। कोई भी दावे कर सकता है। कई लोग और हैं जिन्होंने ईश्वर होने के दावे किए। मैं भी ईश्वर होने के दावा कर सकता हूँ और आप भी ईश्वर होने का दावा कर सकते हैं। पर प्रश्न का उत्तर हम सभी को देना पड़ेगा। हम कैसा परिचय पत्र अपने साथ लाते हैं जो हमारे दावे की पुष्टि करता है ? मेरे मामले में मेरे दावे का खंडन करने में पाँच मिनट भी नहीं लगेंगे। आपके दावे का खंडन करने में भी शायद इससे ज्यादा समय न लगे।

पर बात जब नाजरेथ के ईसा मसीह की आती है, तब यह बहुत आसान नहीं है। उनके पास अपने दावे को पूरा करने का ,परिचय पत्र है। उन्होंने कहा, परन्तु यदि मै करता हूं, तो चाहे मेरी प्रतीति न भी करो, परन्तु उन कामों की तो प्रतीति करो, ताकि तुम जानो, और समझो, कि पिता मुझ में है, और मैं पिता में हूं।12

ईसा मसीह का जीवन – उसका अद्वितीय नैतिक चरित्र

उसका अद्वितीय नैतिक चरित्र उसके दावे से मेल खाता हुआ है। उसकी जीवन शैली इस तरह की थी कि वह अपने शत्रुओं को अपने प्रश्नों द्वारा चुनौती दे सकता था। तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है ?13 उसने उन्हें भी संबोधित किया जिन्होने उसके चरित्र में दोष ढूँढ़ने की चेष्टा की थी पर उन्हें चुप्पी मिली।

हम पढ़ते हैं कि ईसा मसीह शैतान द्वारा प्रलोभित किया गया। पर हमने कभी भी उसकी तरफ से पाप स्वीकारोक्ति नहीं सुनी। उसने कभी भी क्षमा – याचना नहीं की, हालांकि उसने अपने अनुयायियों से ऐसा करने को कहा। ईसा की तरफ से किसी नैतिक भावना की विफलता की कमी आश्चर्यजनक है। यह देखते हुए कि वह उस तथ्य से बिल्कुल विपरीत है जो संतों और मनीषियों ने पूर्णतया उम्रभर अनुभव की है। नर और नारी जितना ईश्वर के समीप जाते हैं, उतना ही ज्यादा वे अपनी असफलता, भ्रष्टाचार और कमियों से अभिभूत होते हैं। एक चमकते हुए प्रकाश के नजदीक, उसे स्नान की आवश्यकता का अधिक एहसास होता है। साधारण मनुष्यों के लिये, नैतिक क्षेत्र में यह सत्य है।

यह भी अद्भुत है कि यूहन्ना, पॉल और पतरस सभी को बचपन से ही पाप की सार्वभौमता पर विश्वास करने का प्रशिक्षण मिला था। उन सभी ने ईसामसीह के पापरहित होने की चर्चा की। न तो उस ने पाप किया, और न उसके मुंह से छल की कोई बात निकली।14

पाइलेट ने भी, जिसने ईसा मसीह को मृत्युदंड सुनाया पूछा,” इसने ऎसा क्या पाप किया है?” भीड़ की बात सुनने के बाद पाइलेट ने यह निष्कर्ष निकाला, “मै इस व्यक्ति के खून के लिए निर्दोष हूँ,तुम इसे खुद देखो।“ भीड़ निर्दयतापूर्वक ईसा को शूली पर चढ़ाने की माँग करती रही ( ईश –निन्दा के लिये,ईश्वर होने का दावा करने के लिये ) रोमन सूबेदार जिसने ईसा मसीह को शूली पर चढ़ाने में हाथ बँटाया था, कहा, सचमुच “यह परमेश्वर का पुत्र था ”15

ईसा मसीह का जीवन – उसने बीमार को चंगा किया।

ईसा मसीह ने निरंतर बीमारी और रोग पर शक्ति का प्रदर्शन किया। उसने लंगड़े को चलवाया, गूंगे से बुलवाया और अंधे को दिखाया। उसकी चिकित्सा जन्मजात समस्या को लेकर थी जो मनोदैहिक इलाज के लिए अति संवेदनशील नहीं थी।

उदाहरणस्वरूप, एक भिखारी जो मंदिर के बाहर बैठता था और जन्म से अंधा था, ईसा मसीह ने उसे ठीक कर दिया। जब प्राधिकारियों ने भिखारी से प्रश्न किया कि क्या हुआ था, तब उसने कहा, एक चीज मैं जानता हूँ। मैं अंधा था, पर अब मैं देख सकता हूँ। उसे आश्चर्य हो रहा था कि इन धर्म के प्राधिकारियों ने ईश्वर के पुत्र को इस आरोग्य साधक के रूप में नहीं पहचाना।16 उसके लिए यह प्रमाण स्पष्ट था।

ईसा मसीह का जीवन – उनकी प्रकृति को नियंत्रित करने की क्षमता

ईसा मसीह ने प्रकृति पर एक अलौकिक शक्ति का प्रदर्शन किया। केवल शब्दों द्वारा, उसने तेज हवाओं और लहरोंवाले आते हुए तूफान को गैलिली के समुद्र पर शांत किया। जो नावों पर सवार थे वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?17 एक विवाह में उसने पानी को शराब में बदल दिया। उसने 5000 लोगों की भीड़ को पांच रोटियों और दो मछलियों से खाना खिलाया। उसने एक दुखी विधवा के इकलौते बेटे को मृत से जीवित कर दिया।

लेजारस, ईसा का मित्र मर गया था और चार दिनों तक वह कब्र में था, फिर भी ईसा ने उसे पुकारा, लेजारस आ जाओ और नाटकीय तरीके से उसे मृत शरीर से वापस जीवित कर दिया। कई लोग उसके गवाह थे। यह बहुत महत्वपूर्ण था कि उसके शत्रुओं ने उसके चमत्कारों को नहीं अस्वीकारा, बल्कि उसे मारने का फैसला लिया। यदि हम उसे यों ही छोड़ दे, तो सब उस पर विश्वास ले आएंगे और रोमी आकर हमारी जगह और जाति दोनों पर अधिकार कर लेंगे।18

क्या ईसा मसीह ईश्वर था, जैसा कि वह दावा करता था

ईसा मसीह के परमेश्वर होने का सर्वोच्च सबूत उसके खुद मृत होने के बाद पुनः जी उठना है। अपने जीवनकाल में पाँच बार ईसा ने स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी की कि किस विशिष्ट तरीके से उसे मारा जाएगा और इस बात की पुष्टि की कि तीन दिन बाद वह मृत शरीर को छोड़कर फिर जीवित होगा।

यह एक बड़ा परीक्षण था। यह एक ऐसा दावा था जिसे प्रमाणित करना आसान था। या तो ऐसा होता या फिर नहीँ। या तो यह उसकी बताई गई पहचान को सच साबित कर देता या उसे नष्ट कर देता। आपके और मेरे लिए महत्वपूर्ण होता, क्योंकि यदि ईसा मृत शरीर से वापस आता तो सच साबित हो जाता, नहीं तो यह हँसी का बयान बन जाता।

“ मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।19 जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा।20 और मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हू--- ”21

इस प्रकार अपने ही शब्दों में उसने यह सबूत दिया। “ मनुष्य का पुत्र मनुष्यों के हाथ में पकड़वाया जाएगा, और वे उसे मार डालेंगे, और वह मरने के तीन दिन बाद जी उठेगा।”22

इसका अर्थ क्या है

अगर ईसा मृत से जीवित हुए, हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व है, ईश्वर कैसा है, हम उसे अपने व्यक्तिगत अनुभव से कैसे जान सकते हैं। ब्रह्मांड का कोई उद्देश्य और अर्थ है और इस जीवन में जीवित ईश्वर का अनुभव करना संभव है।

बातें सस्ती होती हैं। दावे कोई भी कर सकता है। पर बात जब नाजरथ के ईसामसीह की आती है --- उनके पास अपने दावे को पूरा करने के प्रमाणपत्र थे।

दूसरी तरफ, अगर ईसा मृत से जीवित नहीं होते तो ईसाई धर्म के उद्देश्य की कोई वैधता या वास्तविकता नहीं होती। शहीद जो शेर के सामने गाते हुए चले गए और समकालीन धर्मप्रचारक जिन्होंने उनका संदेश दूसरों को देने में अपने प्राण गँवा दिए,गरीब मोहित मूर्ख थे। पॉल महान ईसाई धर्म के प्रचारक ने लिखा है, “यदि मसीह भी नहीं जी उठा, तो हमारा प्रचार करना भी व्यर्थ है; और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है।”23 पॉल ने अपना पूरा विवरण ईसा के मृत शरीर के जीवित होने पर लिखा है।

क्या ईसा ने सिद्ध किया कि वह परमेश्वर है

आइए ईसा के पुनर्जीवन के प्रमाणों पर एक नजर डालें –

ईसा ने जितने भी चमत्कारों का प्रदर्शन किया, उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि ईसा आसानी से शूली से अपने आपको बचा सकते थे, पर उसने ऐसा करना नहीं चुना।

उसे बंदी बनाते समय, ईसा के मित्र पतरस ने उसे बचाने की चेष्टा की।25 उसमें इस प्रकार की शक्ति स्वर्ग और पृथ्वी दोनों में थी। ईसा मसीह ने अपनी इच्छा से अपनी मृत्यु को स्वीकार किया।

ईसा मसीह का शूली पर चढ़ना और उनका शवाधान

ईसा मसीह की मृत्यु भीड़ के सामने उसे शूली पर चढ़ाकर की गई। यह रोमन सरकार का कई शताब्दियों से चला आ रहा यातना देने का और मारने का एक आम तरीका था। ईसा मसीह के खिलाफ ईश निन्दा ( ईश होने का दावा करने का) आरोप था। ईसा ने कहा कि यह हमारे पापों का भुगतान है।

ईसा मसीह को एकाधिक रस्सियों के कोड़े से मारा गया जिसमें धातु और हड्डी के खंडित टुकड़े जड़े थे। लंबे काँटों का एक हास्यास्पद मुकुट उसकी खोपड़ी पर रखा गया। उन्होंने ईसा मसीह को जेरुसलम के बाहर उस फाँसीदंड के पहाड़ पर चल कर जाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने उसे एक लकड़ी के सलीब ( क्रॉस ) पर लटका दिया। उसके पैरों और कलाइयों को सलीब पर कीलों से ठोक दिया। जबतक वह मर नहीं गया, उसपर लटका रहा।यह जानने के लिए कि वह मर चुका हैं या नहीं, उसके पंजर को बरछे से बेधा गया।

यीशु की लोथ को सलीब से उतारा गया और उसे सुगन्ध और द्रव्य के साथ कफन में लपेटा गया। यीशु के शरीर को एक ठोस चट्टानवाली कब्र में रखा गया।कब्र के द्वार पर एक बहुत बड़ा पत्थर रखा गया ताकि प्रवेश द्वार सुरक्षित रहे।

सब जानते थे कि य़ीशु ने कहा था कि वह तीन दिन बाद मृत शरीर से जीवित हो उठेगा। अतः उन्होंने कब्र पर प्रशिक्षित रोमन सैनिकों का एक पहरेदार तैनात कर दिया। उन्होंने कब्र के बाहर एक सरकारी रोमन मुहर चिपका दी ताकि यह घोषित हो सके कि वह सरकारी संपत्ति है।

तीन दिन बाद, वह कब्र खाली थी।

इन सब के बावजूद, तीन दिन बाद वह पत्थर जो कि कब्र को बंद कर रहा था, वह कब्र से कुछ दूर एक ढलान पर पाया गया। ईसा का शरीर वहाँ नहीं था। कब्र में केवल क्षोमवस्त्र पड़े थे।

इस बात पर ध्यान देना आवश्यक है कि ईसा के आलोचक और अनुयायी दोनों मानते हैं कि कब्र खाली थी और उसका शरीर गायब था।

पहले यह व्याख्यान दिया गया था कि जब पहरेदार सो रहे थे तब उसके शिष्यों ने उसका शरीर चुरा लिया था। पर यह तथ्यहीन लगता है क्योंकि रोमन सेना के प्रशिक्षित पहरेदारों का इस प्रकार पहरे के समय सो जाना मृत्युदंड के अपराध से कम नहीं था। इसके अलावा, प्रत्येक शिष्य को इस दावे के लिए कि यीशु मृत शरीर से पुन- जीवित हुए, अकेला करके और एक दूसरे से अलग करके यातना दी गई और शहीद किया गया। पुरुषों और स्त्रियों को मरना पड़ा क्योंकि जिसे वे सच मानते थे हो सकता था वह वास्तव में झूठ हो। अगर वे उसे झूठ मानते तो उन्हें मरना नहीं पड़ता। अपनी मृत्यु के समय हर मनुष्य सच बोलता है।

यह हो सकता है कि प्राधिकारियों ने ईसा के शरीर को वहाँ से हटा दिया हो। उन्होंने ईसा को शूली पर चढाया ताकि लोगों को उनपर विश्वास करने से रोक सकें।पर यह भी एक कमजोर संभावना है। अगर उनके पास ईसा का शरीर होता तो वे उसे जेरुसलम के नगर में घुमाते।चैन की नींद सोते हुए सफलतापूर्वक उन्होंने ईसाई धर्म का गला घोंट दिया होता। पर उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह इस बात की गवाही देता है कि उनके पास ईसा का मृत शरीर नहीं था।

दूसरा मत यह है कि स्त्रियाँ व्याकुल और दुख से अभिभूत होकर सुबह के धुंधलेपन में अपना रास्ता भूलकर गलत कब्र में चली गई हों। अपनी पीड़ा में उन्होंने कल्पना कर ली हो कि ईसा पुनःजीवित हो गए हैं क्योंकि उसकी कब्र खाली है। पर इसमें भी संदेह है क्योंकि अगर औरतें गलत कब्र में चली गई तो महायाजकों और धर्म के दूसरे शत्रुओं ने सही कब्र पर जाकर ईसा का शरीर क्यों नहीं दिखाया। नर और नारी उस सच्चाई के लिए मरते हैं जिसपर वे विश्वास करते हैं, हो सकता है वह वास्तव में झूठ हो। पर वे उसके लिए नहीं मरते जो वे जानते हैं कि झूठ है। अपनी मृत्यु के समय मनुष्य हमेशा सच बोलता है।

दूसरी संभावना कुछ लोगों के अनुसार “स्वून सिद्धांत” की है। उसके अनुसार ईसा वास्तव में मरे ही नहीं। गलती से यह खबर दी गई कि वह मर गया है,पर वह वास्तव में थकान, दर्द और खून की कमी से अचेत हो गया। कब्र की ठंडक की वजह से उसमें चेतना लौट आई। आपको इस तथ्य को अनदेखा करना होगा कि उसके पंजर को बरछे से बेधा गया था ताकि चिकित्सकीय यह सिद्ध किया जा सके कि वह मर चुका था।

नर और नारी उस सच्चाई के लिए मरते हैं जिसपर वे विश्वास करते हैं, हो सकता है वह वास्तव में झूठ हो। पर वे उसके लिए नहीं मरते जो वे जानते हैं कि झूठ है।

पर एक क्षण के लिए यह मान लें कि ईसा को जिन्दा दफनाया गया और वह अचेत हो गया। क्या यह मानना संभव है कि तीन दिन तक वह बिना भोजन पानी के या किसी भी प्रकार की देखभाल के गीली कब्र में जीवित रहा। क्या उसमें इतनी ताकत थी कि अपने आप को कब्र के कपड़े से बाहर निकाले, भारी पत्थर को कब्र के मुँह से हटाएँ,रोमन पहरेदारों पर विजय पाएं और मीलों तक पैरों पर चलकर जाएँ जो कीलों से बेधा गया हो। ये सब सही नहीं दिखते।

फिर भी, यह केवल खाली कब्र नहीं थी जिसने ईसा के अनुयायियों को अपने प्रभु पर विश्वास करने को सहमत किया।

केवल खाली कब्र ही नहीं

केवल खाली कब्र ने ही उन्हें यह यकीन नहीं दिलाया कि ईसा असल में मृत से जीवित हुए, वे जीवित थे और परमेश्वर थे। ईसा कई बार दिखाई दिए, जीवित हाड़ माँस के व्यक्ति के रूप में,उनके साथ खाना खाया, उनसे बातें कीं। इन सभी बातों ने उन्हें यकीन दिलाया।

लूका इंजील के लेखकों में से एक ने ईसा के बारे में कहा, “उस ने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पड़े प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा: और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा।”26

क्या ईसामसीह परमेश्वर हैं

इंजील के चारों लेखक ये बताते हैं कि ईसा को दफनाने के बाद वह शारीरिक रूप से उन्हें दिखाई पड़े। एक बार जब वह शिष्यों को दिखाई दिए तो थोमा वहाँ नहीं था। जब दूसरे शिष्यों ने थोमा को उसके बारे में बताया तो थोमा ने विश्वास नहीं किया। उसने साफ कहा,” जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के छेद देख न लूँ और कीलों के छेदों में अपनी उंगलियाँ न डाल लूँ और उसके पंजर में अपना हाथ न डाल लूँ,तबतक मैं प्रतीति नहीं करूँगा।“

एक सप्ताह बाद ईसा उन्हें फिर से दिखाई दिए। उस समय थोमा भी उनके साथ था। ईसा ने थोमा से कहा अपनी उंगली यहाँ लाकर मेरे हाथों को देख और अपने हाथ लाकर मेरे पंजर पर डाल। अविश्वासी नहीं बल्कि विश्वासी बन। यह सुनकर थोमा ने जवाब दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर ।।

ईसा ने उससे कहा, तूने मुझे देखकर मेरा विश्वास किया है, वे लोग धन्य हैं जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया।।27

आपका अवसर

ईसा ने यह सब क्यों किया उन्होंने ऐसा किया ताकि हम उन पर विश्वास करके ईश्वर को इस जन्म में जान सकें।

ईसा अपने साथ हमारा संबन्ध बनाकर हमें एक अर्थपूर्ण जीवन से ज्यादा प्रदान करते हैं।ईसा ने कहा, “ मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। ”28

आप ईसा के साथ एक घनिष्ट संबंध इसी समय से स्थापित कर सकते हैं। आप पृथ्वी पर इसी जीवन में और मरने के बाद अनंत में प्रभु को व्यक्तिगत रूप से जान सकते हैं।यहाँ प्रभु का प्रण है जो कि उसने हमसे किया है

“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उसपर विश्वास करे,उसका नाश न हो,परन्तु वह अनन्त जीवन पाए।”29 यीशु ने हमारे पापों को सलीब पर अपने ऊपर ले लिया। हमारे पापों के लिए उन्होंने दंड स्वीकार किया ताकि हमारे पाप उनके और हमारे बीच दीवार न बन सकें।उन्होंने हमारे पापों का पूरा भुगतान किया। अतः वे हमें पूर्ण क्षमा और अपने साथ एक रिश्ता प्रदान करते हैं।

यहाँ बताया गया है कि आप अपने रिश्ते की शुरुआत कैसे कर सकते हैं

ईसा ने कहा,” देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं; यदि कोई मेरा शब्द सुन कर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आ कर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ।”30

आप ईसा मसीह को इसी समय से अपने जीवन में आमंत्रित कर सकते हैं। आप उसके प्रति कैसी प्रतिक्रिया करते हैं, यह मुख्य है,शब्द नहीं। यह जानते हुए कि उसने आपके लिए क्या किया है और क्या कर रहा है,आप उससे कुछ ऐसे कह सकते हैं

यीशु मैं आप पर विश्वास करता हूँ। यीशु मेरे पापों के कारण सलीब पर मरने के लिए घन्यवाद। मैं चाहता हूं कि आप मुझे क्षमा करें और अभी इसी समय से मेरे जीवन में आइए। मैं आपको जानना चाहता हूँ और आपके पीछे चलना चाहता हूँ। मेरे जीवन में आने के लिए और मेरे साथ अभी से एक रिश्ता बनाने के लिए धन्यवाद। धन्यवाद

अगर आप ईसा को अपने जीवन में लाना चाहते हैं,हम यीशु को और अच्छी तरह से जानने में आपकी मदद करना चाहते हैं। हमारी मदद के लिए कृपया निःसंकोच होकर नीचे दी गई किसी भी लिंक पर क्लिक करें।

 मैंने यीशु को मेरे जीवन में आने के लिए कहा (कुछ उपयोगी जानकारी इस प्रकार है) ...
 मैंने अपने जीवन में यीशु पूछना चाहते हो सकता है, और पूरी तरह से यह समझाने कृपया ...
 मेरा एक सवाल है ...

पॉल ई लिट्ल द्वारा नो वाई यू बिलीव से रूपांतरण किया गया है, विक्टर बुक्स द्वारा प्रकाशित, कॉपीराइट( सी )1988,एसपी पब्लिकेशन्स, वीटन,।।,60187 इजाजत द्वारा प्रयोग

(1) मत्ती 7:29 (2) मत्ती 16:15-16 (3) यूहन्ना 5:18 (4) यूहन्ना10:33 (5) मरकुस 14:61-64 (6) यूहन्ना 8:19,14:7 (7) 12:45,14:9 (8) 12:44,14:1 (9) मरकुस 9:37 (10) यूहन्ना 15:23 (11) यूहन्ना 5:23 (12) यूहन्ना 10:38 (13) यूहन्ना 8:46 (14) पतरस 2:22 (15) मत्ती 27:54 (16) यूहन्ना 9:25,32 (17) मरकुस 4:41 (18) यूहन्ना 11:48 (19) यूहन्ना 14:6 (20) यूहन्ना 8:12 (21) यूहन्ना 10:28 (22) मरकुस 9:31 (23) 1 कुरिन्थियों 15:14 (24) यूहन्ना 10:18 (25) मत्ती 26:52,53 (26) प्रेरितों के काम 1:3 (27) यूहन्ना 20:24-29 (28) यूहन्ना 10:10 (29) यूहन्ना 3:16 (30) प्रकाशित वाक्य 3:20

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