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जीवन से संबंधित प्रश्न

किस तरह आप नशे पर विजय पा सकते है ?

आपने सोचा होगा , “ थोड़ा सा और आत्मबल , फिर मैं ठीक हो जाऊँगा। ” व्यक्तिगत कहानी यह बताती है कि आत्मबल या इच्छाशक्ति क्यों काम नहीं करते , क्या होगा ...........

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टेड एन के द्वारा

एक नशे के आदी का जीवन एक जमे हुए तख्ते के संग्रथित चित्र की तरह होता है। जैसे उस रात जब मैं अपने माता – पिता को घर छोड़ने गया तब मैंने ध्यान दिया कि मेरे दर्पण पर डांवाडोल लाल और नीला प्रकाश चमका। जब मैंने अपनी गाड़ी की गति को 95 से एक सामान्य गति पर रोका तो मैंने यह महसूस किया कि मैंने केवल नहाने का चोंगा और एक हरा ऊनी चारखानेदार पैट जैसा पैजामा पहना है। मैंने जल्दी से गिनना शुरू किया कि पिछले कुछ घंटों में मैंने कितने पेग पिए हैं। मुझे याद आया कि मेरी फूली हुई जेब में आधी ग्राम हेरोइन पड़ी है और उसी तरह की और अनुल्लेख्य नशीली चीजें मेरी गाड़ी के इर्द – गिर्द फैली पड़ी हैं।

जिस तरह रविवार की सुबह शांत होती है उसी प्रकार मैं शांत था ........जो उस दिन थी। यह जानते हुए कि मेरे माता – पिता और मेरा भाई उस समय घर से बाहर बेंच पर बैठकर , मेरे लिए प्रार्थना कर रहे होंगे , मैं बहुत बार रविवार को 9 और 11 बजे के बीच घर के चक्कर लगाया करता था। मेरा घर आना बेहतर समय बिताने के लिए या अपने परिवार के साथ मिलकर खाना खाने के लिए नहीं होता था बल्कि मैं पैसों की जरूरत के लिए वहाँ आता था। लेकिन , उस रात , उस समय सुबह के 3 ही बजे थे और मैं चर्च के खुलने का इंतजार नहीं कर सकता था।

पर उस पुलिसवाले का क्या ? उस पुलिसवाले ने नीली वर्दी पहनी थी और कसम खाई थी कि हमारे खेत के प्रधान मार्ग की रक्षा करेगा। उसने अपनी कठोर उंगली से गाड़ी की खिड़की पर खटखट की। मैंने अपनी आधी जली हुई सिगरेट को माउंटेन ड्यू के एक खाली डब्बे में डालकर गाड़ी का शीशा नीचे किया। मैंने उसे अपनी कोई गुप्त बात नहीं बताई। उसने मुझसे रात में पहने गए मेरे कपड़ों के बारे में , समय या मेरे अस्थिर हाथों के बारे में कुछ भी नहीं कहा। वह हिरणों के बारे में बातें करता रहा और कहा कि एक ड्राइवर के लिए वे कितने खतरनाक हो सकते हैं , खासकर जब वे कुलाँचे भरते हुए सड़क के पार जाने की कोशिश करते हैं। वह क्षमा करनेवाला व्यक्ति था और बिना हवाला जारी किए अपने जीवंत जंगी जहाज पर लौट गया। मैंने अनुमान लगाया कि शायद मैं उसे नशे में चूर होने के बजाय थका हुआ ज्यादा लगा।

कुछ समय तक नशे में चूर दिखाई पड़े बिना मैं आराम से ब्रांडी के कई पैग प्रचुर मात्रा में पी सका। पर वास्तव में नशे में थोड़ा चूर होने पर ही मैं ठीक रहता था और शराब बहुत अधिक पी लेने पर मैं अपने आप को सामान्य के समीप महसूस करता था। जब तक वह चला नहीं गया मैं बहुत शांत था। जब मैं गाड़ी चलाने लगा तो लगभग निराश सा था और मैंने एक नई सिगरेट सुलगा ली थी। वह मेरा प्रतिद्वन्दी नहीं था। मैंने अपना सिर उठाकर दर्पण में देखा और खुद को अपना प्रतिद्वंदी पाया।

नशा किस तरह का है ? अलगाव पैदा करनेवाला

मैं अपने खुद के साथ को , पसंद और नापसंद दोनों करता था। मैं खुद से डरता था कि अगर मैं बहुत समय तक अकेला रहूँगा तो पता नहीं क्या कर बैठूँ। एक से अधिक अवसरों पर मैंने अपने आपको रसोईघर में चाँदी के बर्तनोंवाली अधखुली दराज के सामने और हाथ में एक तेज धारवाला चाकू हाथ में लिए खड़ा पाया , जिसकी नोक मेरे गले पर रखी हुई थी। मैं कुछ या कुछ भी , महसूस करना चाहता था। मैं मरना चाहता था पर वास्तव में मैं केवल जीना चाहता था। दूसरे दिन सुबह मैं ऐसे बड़े आदमी की तरह रसोईघर की जमीन से सोकर उठता था जो सोने के लिए रोया हो , टूटा हुआ हो , कायर , बंदी और बिल्कुल अकेला हो।

कुछ समय के लिए मैं पार्टियों में भी गया। जब मैं लोगों से भरे हुए कमरों को देखता तो उस बिन्दु पर मैं आशावादी हो जाता पर लोगों के चेहरे देखने के बाद मेरा किसी से बात करने का मन नहीं करता। ऐसा नहीं था कि मैं गलत जनसमूह का चुनाव करता था। यह मेरी सामाजिक असंतुष्टता और संघर्ष था जिसकी वजह से मुझे जबरदस्ती दूसरों से बात करने के लिए बाध्य होना पड़ता था। यह मुझे बहुत थकानेवाला था। मैं दस मिनट तक यह दिखाने की कोशिश करता कि मैं कितना तल्लीन हूँ और फिर यह दिखाता कि मैं सिगरेट लेने बाहर जा रहा हूँ। बाहर जाकर उनसे बचने के लिए चोरों की तरह छिपकर अपनी गाड़ी में जाकर बैठ जाता। पहले कुछ सालों में जब ऐसा होता था तब मेरे मित्र मुझे फोन करते और पूछते थे कि भागकर मैं कहाँ गया हूँ। फिर धीरे – धीरे लोगों ने पूछना बंद कर दिया।

चलचित्रों में यह बड़ा मजेदार लगता है जब लोग किसी अनजान बिस्तर पर या किसी आवारा बग्घी पर जागते हैं और उनके पास इसका कोई सुराग नहीं रहता कि वे वहाँ कैसे पहुँचे। मुझे याद नहीं आता कि जब मेरी आँख अपनी एस यू वी की ड्राइवर सीट पर खुली हो , जो कि किसी गलत ईमारत के सामने खड़ी की गई थी और मुझे यह जानकर खुशी हुई हो । मुझे कभी इस बात पर भी हँसी नहीं आई जब मुझे पता चला कि मैं जमीन के गीले कालीन पर से उठकर मुश्किल से अपने घर वापस जाने का रास्ता खोज रहा था।

मैं अपने घर में रहना पसंद करता था। केवल सिगरेट पीने , शराब पीने या कुछ नशीले पदार्थ लेने के लिए ही बाहर जाता था। ऐसा करना सुरक्षित था। मैं बाद में यह जानकर आश्चर्य नहीं करना चाहता था कि मैंने किसी को मार दिया है। अतः मैंने यह फैसला लिया कि मैं बाहर नहीं जाऊँगा। पूरे पागलपन के लिए पूर्ण अलगाव ही एकमात्र साधन है , यह सुनिश्चित करने के लिए मैंने अपने कमरे के दरवाजों पर ताला लगा दिया और कई दिनों तक कमरे के पर्दों को भी बंद कर दिया।

किसी भी नशे का मूल कारण क्या है ? एक मानसिक बाधा …

एक मादक द्रव्य का नशा करनेवाले या एक शराबी से बात करते समय ( मेरी राय में दोनों में कोई अंतर नहीं है ) ऐसा लगता है कि उनसे बात करने में या एक बच्चे से बात करने में कोई अंतर नहीं है। शारीरिक तौर पर वे दोनों वहाँ मौजूद रहते हैं पर मानसिक रूप से उनमें परिपक्वता का अभाव रहता है। मुझे लम्बे , दिली स्वगत भाषण उन्हें देना बहुत पसंद था जो जीवन के कष्टों और ईश्वर की निर्ममता के बारे में सुन सकते थे। जैसे – जैसे मेरे भाषणों की लम्बाई बढ़ती गई तथा वे भाषण और ज्यादा निराशाजनक होते गए , वैसे – वैसे मेरे श्रोतागणों की संख्या घटती गई।

रात का समय मेरे लिए आरामदायक होता था। मेरे अत्यधिक पीने का और निगलने का , खर्राटे भरने का , धूम्रपान का अंतराल या अपने शरीर में कुछ भी घुसाने की कोशिश , जो मुझे कुछ राहत दे सके ...... पर मुझे पता नहीं था कि वैसी चीज क्या है ? वह क्या चीज थी जिससे मैंने सोचा कि मैं बचना चाहता हूँ ? समय के बीतने के साथ – साथ मेरी परेशानी के कारण भी लौटने लगे। शराब पीना और नशे की चीजों का इस्तेमाल करना काफी समय तक मेरे उद्देश्य की पूर्ति करते रहे थे। उससे मुझे आजादी , स्पष्टता , मन की शांति और हल्केपन का आभास हुआ था। वे सभी समाधान कहाँ गए और कब वे समाधान समस्या बन गए , इसका मुझे पता ही नहीं चला। अब मेरी विडम्बना यह थी कि मेरे बचने के साधन मेरी जेल बन गए थे। मुझे एक नए समाधान की जरूरत थी।

मैं ईश्वर के बारे में यह जानता था कि वह हमें भयानक परिस्थितियों में ले जा सकता है और एक नए अंदाज में उन्हें कुछ अद्भुत भी बना सकता है। यह एक सत्य है जिसे मैं अपनी निजी जिन्दगी में रोज देखता था। जब मैं अपने इलाज के लिए बैठता तो हर वक्त अपने अगले कदम के अस्पष्ट मार्ग को ध्यान में रखते हुए अपने जीवन के बारे में सोचता रहता था। जब मैं अपने जीवन के बीते हुए पिछले दस सालों के बारे में सोचता हूँ तो मुझे यह समझ में नहीं आता कि मैं क्या सोचूँ। क्या वे पूरी तरह से बरबाद हो गए हैं ? इन सब बरबादियों के लिए अब मुझे क्या करना चाहिए ? अपने अतीत के इतने करीब आकर उसे पीछे छोड़ते हुए मैं किस तरह आगे बढ़ूँ ?

पिछले कई सालों में मैं लगातार अपने भूतकाल का विश्लेषण करने की कोशिश कर रहा था ताकि मैं यह देख सकूं कि ईश्वर कहाँ कार्य कर रहे थे ? वह कहाँ थे जब मैं अपने आपको बहुत अकेला और परितक्त्य महसूस कर रहा था। क्या वे उन क्षणों में वहाँ थे जब मैं शराब के कई दर्जन पेग पीने के बाद और नशीली दवाओं की हास्यास्पद संख्या लेने के बाद वापस घर की ओर गाड़ी चलाकर जा रहा था। कई बार जब मैं अनजान जगहों पर जागा , तब क्या ईश्वर वहां थे ? संभवतः वह वहाँ उपस्थित थे। मैं सुबह चार बजे गरम पानी के टब में घुसा और मैंने अपना कुछ समय वहीं पर गुजारा जब सब जा चुके थे। जब मैं वहां से उठा तब मेरे बाल गीले थे और मेरी सहायता करनेवाला वहाँ कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था।

ऐसी बहुत सी परिस्थितियां मेरे सामने आईं जो यह दिखाती थीं कि परमेश्वर की सुरक्षा करनेवाली उपस्थिति और मदद वहाँ मौजूद थी। अगर मैं उस समय उन हस्तक्षेपों के बारे में जान जाता तो मुझे आश्चर्य होता ........ ऐसा क्यों है ? मुझमें ऐसा क्या था जो सुरक्षित रखने के योग्य था ? मैं एक ऐसा आदमी था जो अपने जीवन का खुद मालिक था और मैं इस संसार में अपना कुछ योगदान नहीं दे रहा था , फिर ईश्वर मेरे बारे में क्यों सोच रहे थे

? परेशानी की उन काली रातों में मैं अच्छी तरह से जानता था कि मेज पर पड़ी मेरी उन नशे की गोलियों से या शराब की बोतल से मुझे सच्ची राहत नहीं मिलनेवाली है। इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं उसे आज भी नहीं ढूँढ़ रहा हूँ। साधारण रूप से मैं संतुष्ट नहीं था।

हेरोइन के प्रभाव

रोकर , गुस्से से चिल्लाकर मैं ईश्वर को मदद के लिए पुकार रहा था। हर रात मैं सुबह होने से डरता था क्योंकि मुझे लगता था कि मैं दूसरा दिन सहन ही नहीं कर पाऊंगा। हर चीज मुझे डराती थी। फोन बजने की आवाज , दरवाजे की खटखटाहट , विद्यालय , कार्यालय , सभी लोग , मैं जिनके संपर्क में आता था और सबसे ज्यादा मुझे खुद से डर लगता था। मुझे पता नहीं था कि मैं क्या करनेवाला हूँ। मैं जब अपनी रोटी पर चाकू से मक्खन लगाता था तो मुझे खुद अपना गला काटने की तीव्र इच्छा का विरोध करना पड़ता था। जब मैं अपनी गाड़ी पुल के ऊपर से ले जाता था तो मुझे ऐसा महसूस होता था जैसे मेरे हाथ गाड़ी के पहियों को घुमाकर कगार से नीचे गिराना चाहते हों। अपनी गाड़ी में चढ़ने से पहले दिन की पहली शराब जब मैं अपने प्याले में डालता था तो मुझे यह पता होता था कि सारे दिन में और शराब मेरे प्याले में आएगी।

मैं बहुत चाहता था कि मैं मर जाऊँ। पर मैं यह भी जानता था कि मेरे अंतिम संस्कार की क्रिया बहुत ही उदासीन होगी। किसी को आश्चर्य नहीं होगा। लोग मेरी उपलब्धियों के बजाय मेरी क्षमता के बारे में बातचीत करेंगे। मेरे माता – पिता इसके लिए अपने आपको दोषी मानेंगे और शर्म और पछतावे के साथ जीवन व्यतीत करेंगे। मेरे भाइयों के चेहरे पर से उनकी हँसी और भोलापन गायब हो जाएगा। मेरी स्मृति उनके लिए केवल एक सामान बनकर रह जाएगी।

मेरे सहपाठी पहले के कुछ साल मुझे बहुत प्यार से याद करेंगे और फिर थोड़े समय के बाद मेरे मान के लिए प्याले में शराब डालेंगे। भविष्य में होनेवाली मेरी पत्नी मेरे बारे में कुछ भी नहीं जानेगी और मेरे बच्चे कभी नहीं होंगे। मैं अपने जीवन का अंत इस त्रासदी के साथ नहीं कर सकता था। पर मुझे दूसरा और कोई रास्ता भी नहीं सूझ रहा था। मैं बहुत दूर तक जा चुका था।

मैं एक शराबी , एक नशेबाज , कॉलेज छोड़नेवाला , एक विफल बेटा और भाई , एक डरा हुआ लड़का था जो वह सबकुछ बन गया जिसके बारे में उसने सपने में भी नहीं सोचा था।

व्यसन को छोड़ने के लिए आत्मचाह एक समाधान क्यों नहीं है ?

दो महीनों के उपचार के बाद जब कोई प्रगति नजर नहीं आई तो मैं पहले से और ज्यादा थकान महसूस करने लगा। हालांकि मैंने 60 दिनों से शराब या नशे की कोई गोली नहीं ली थी फिर भी मैं पदार्थों द्वारा इस्तेमाल किया जा रहा था। मेरे पास दूसरे लोगों की तरह व्यवहार का कोई संदर्भ नहीं था। कम से कम जब मैं पीता था तब मैं सोचता था कि जीवन की सभी उम्मीदों से , जिसका प्रदर्शन करने के लिए मैं बुरी तरह सुसज्जित था , कहीं राहत का कोई जरिया होगा। अब मैं बहुत नाजुक हो गया था जिसे आसानी से घायल किया जा सकता था। अपने सामने एक शराब का गिलास रखकर जीने के अलावा या श्रेणीबद्ध करनेवाले की कतार में सफाई से कटकर बिछ जाने के अलावा मेरे सामने कोई समाधान नहीं था।

बहुत बार दर्दनाक निराशा में मैं अपने घुटनों पर बैठकर , यातना के कारण चिल्लाकर कहता था , “परमेश्वर , मेरी मदद करो !” पिछले गत वर्षों में मैंने हमेशा ईश्वर से समाधान की माँग की थी , अपनी इच्छा को कभी ईश्वर के सामने आत्मसमर्पित नहीं किया था। अन्ततः , आज इस रात जब मैं अपने कमरे में अकेला था , मैं ईमानदारी से ईश्वर को संबोधित करना चाहता था। मैंने उसे अपने परिवर्तन की निराशाजनक सच्चाई के बारे में बताया। मैने उससे कहा कि मैं अपने नशे की लत को छोड़ना चाहता हूँ और उसके लिए कार्यरत होना चाहता हूँ। मैं इस आशा में बैठकर इंतजार नहीं करना चाहता हूँ कि वह मुझसे छुड़ाई जाएगी। उस रात मैं चैन की नींद सोया।

उस दिन पहली बार मैंने आजादी का स्वाद चखा जिसके बारे में मुझे बिल्कुल जानकारी नहीं थी। उस रात की प्रार्थना में और बाकी दिनों की प्रार्थना में केवल एक ही महत्त्वपूर्ण और ताकतवर शब्द का अंतर था -- आस्था। अपने ऩशे के सबसे बुरे क्षणों में भी मुझे एक सीमा तक यह यह विश्वास था कि ईश्वर मुझे उस बोझ से मुक्ति दिला सकते हैं। फिर भी मैंने चीजों को अपनी तरह से करने की कोशिश की थी। इससे पहले मैंने कभी भी अपनी समस्या को ईश्वर को समर्पित नहीं किया था और न ही उससे इस विषय में कभी मार्गदर्शन या बुद्धिमता की माँग की थी कि इसमें मेरी भूमिका क्या होनी चाहिए। यह पहली बार था जब मेरे पास इस बात का आश्वासन था “ तब ठीक है , ईश्वर ही इसका ध्यान रखेगा क्योंकि इतिहास बताता है कि मैं नहीं रख सकता। ”

लोग सोचते हैं कि आत्मचाह से नशे की लत छूट सकती है। मैं जानता था कि मेरे नशे की आदत परपीड्यकामुकता थी , पर नशीली चीजों और शराब के नशे के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। वह मेरा पतन था , मेरा एकमात्र साथी और जीने का अकेला सहारा था। ऐसी दुविधा में आत्मचाह का सहारा लेना असंभव था। अगर मुझमें अपनी महान दुविधा की स्पष्टता नहीं होती तो इस संसार में मैं कैसे उसके अस्तित्व पर विजय पा सकता था ? ईश्वर के होने के लिए मैं ईश्वर को धन्यवाद देता हूँ।

क्या नशे से भी ताकतवर कुछ और है ?

नशा एक मक्कार , दयाहीन , अचल दिखनेवाला बल है। पर यदि उसे ईश्वर के साथ चक्र में रखा जाय तो वह एक मजाक के सिवा कुछ नहीं है। जिस तरह नशे की लत को छुड़ाने की चाह में मेरी आत्मचाह और मानवशक्ति की शर्मनाक पराजय हुई , उसी तरह ईश्वर की शक्ति के द्वारा नशे का सर्वनाश हो गया। मुझे इसमें तनिक सा भी संदेह नहीं है कि नशे की लत शैतान का सबसे प्रिय शस्त्र है। मेरी कल्पना के अनुसार यह बीमारी बिल्कुल उसी तरह की है जब एक मनुष्य शैतान के अधीन होकर उन्मादित हो जाता है। एक नशे की लत से आरोग्य की प्राप्ति वास्तव में एक आध्यात्मिक लड़ाई है।

अब मैं जानता हूँ कि उन भटकानेवाले निराशापूर्वक बीते सालों के लिए पछतावा करने का कोई फायदा नहीं है। उन्हें याद करना सुखद नहीं है , पर उनके कारण ही मेरे जीवन में इतनी अच्छी चीजें आई हैं। उनके बिना ईश्वर की महानता और उसके महत्त्व का गुणगान का पूरा वर्णन अधूरा रह जाता। वास्तव में अब मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि बिना उतना दुख पाए और बेबसी के बिना मुझ जैसा अभिमानी और जिद्दी मनुष्य कभी भी ईश्वर को नहीं जान पाता। ईश्वर से मेरा परिचय एक प्रकार से , मजबूरी के कारण था।

ईश्वर के साथ मेरा रिश्ता धीरे – धीरे विकसित होने लगा। बहुत बार आज भी जब मैं प्रतिरोधी और विश्वासघाती बनने लगता हूँ तब जिस तरह मेरे नशे की लत ने मेरा परिचय ईश्वर के साथ करवाया , उसी तरह मेरी लगातार होनेवाली आरोग्य प्राप्ति ने मुझे ईश्वर के साथ बढ़नेवाली निकटता की जरूरत महसूस करवायी और प्रोत्साहन दिया। मेरी आरोग्य प्राप्ति का कार्यक्रम बहुत ही सरल है -- ईश्वर को ढूँढ़ना , चाहे मैं चाहूँ या न चाहूँ।

बाइबल में , पॉल ने अपने दोस्तों के लिए यह लिखा है जो कि ईसामसीह के भी अनुयायी थे , “ .....जो बातें सत्य हैं , और जो जो बातें आदरणीय हैं , और जो जो बातें उचित हैं , और जो जो बातें पवित्र हैं , और जो जो बातें सुहावनी हैं , और जो जो बातें मनभावनी हैं , निदान , जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं , उन्हीं पर ध्यान लगाया करो। …… उन्हीं का पालन किया करो , तब परमेश्वर जो शान्ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा॥ ”1 नशीली चीजों को नाक से सूँघने के बजाय मुझे यह विचार अच्छा लगा कि मैं उन चीजों को अपना आवास बनाऊँ जो बाइबल में कही गई हैं।

मेरे नशे की लत से मुझे क्या फायदा हुआ ?

मेराभूतकाल , चाहे जितना भी विकट रहा हो वास्तव में अब बेशकीमती संपत्ति बन गया है। अब यह मेरी जिम्मेदारी बनती है कि मैं उन सबकी मदद करूँ ताकि वे भी मेरी तरह आरोग्य प्राप्ति को खोज सकें और उसे बनाए रख सकें। यह हमारा एक जैसा अनुभव है जिसने हमें एक बंधन में बाँध रखा है। हर सप्ताह कोई न कोई आदमी जो कि आरोग्य प्राप्ति के लिए नया है , जिसे उससे निकलने का रास्ता समझ में नहीं आ रहा है , मुझे अपने हाल ही के बीते इतिहास की कहानी बताता है कि किस प्रकार उसका गत जीवन उसे डराता रहता था और उसे शराब का दूसरा पेग बनाने के लिए या नशीली दवाओं की एक और सिरिंज भरने के लिए बाध्य करता था। वे लोग मुझे हिचकिचाहट के साथ अपनी महान शर्मनाक हरकतों के बारे में बताते हैं और उनकी आँखों में निर्णय का भय दिखाई देता है। जब उनका बताना खत्म हो जाता है तो वे अपना सिर झुका लेते है ताकि उन्हें दूसरी आँखों का सामना न करना पड़े। मैं हँसकर पूरी ईमानदारी के साथ उनसे कहता हूँ , “ हाँ , मैंने भी ऐसा किया था। ” अचानक यह सुनकर उनकी शर्मिन्दगी का बोझ और उनकी विशिष्टता धुल जाती है। फिर मैं उन्हें बताता हूँ कि आज चीजें मेरे लिए कितनी अलग हैं। किसी चमत्कार का होना , जो कि किया गया हो या आपके लिए हो दोनों एक ही बातें हैँ , पर किसी और के द्वारा किए गए चमत्कार में अपनी मर्जी से एक भूमिका निभाना --- एक उदात्त विशेषाधिकार है।

किस प्रकार एक कानून तोड़नेवाला , नशेबाज , पियक्कड़ , हर क्षेत्र में असफल रहनेवाला व्यक्ति ईश्वर का प्रतिनिधि बन सकता है ? मैं , जो कि कुछ साल पहले तक यह सोचता था कि यह संसार मेरे बिना बहुत बेहतर है , अब कैसे परमेश्वर की बोली लगाता हूँ ? पर मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं है क्योंकि ईश्वर के काम करने का तरीका मेरी समझ से परे है। ऐसा लगता है कि वह मजाक में वैसे लोगों का प्रयोग अपने सहायक उपकरण के रूप में करता है जो कि समाज के लिए तुच्छ हैं। अगर कारण वह है तो मैं ज्यादा समय प्रश्न करने में बरबाद नहीं करना चाहता हूँ।

अपने आपको ईश्वर को समर्पित करने और अपने संयम के साथ कठोर परिश्रम के छः महीनों के बाद , मैंने फिर से स्कूल में दाखिला लिया। कॉलेज के अनुभव जिसके होने की मैं स्वप्न में भी कल्पना नहीं कर सकता था और लैटिन में प्रावीण्यता के साथ मैंने जल्दी ही स्नातक की उपाधि हासिल की। उस बात को आज तीन साल से ज्यादा हो गए हैं जब उस रात मैं अपने घुटनों पर बैठा था और उसके बाद से मैंने कभी अपने आपको उतना निराशाजनक महसूस नहीं किया है। मेरा जीवन अब केवल “ ठीक है ” नहीं है , बल्कि वह असाधारण है। मेरे कहने का अर्थ यह नहीं है कि मेरे पास करोड़ों डॉलर हैं , सभी लोग सोचते हैं कि मैं सबसे बड़ा हूँ , ख्याति है , ऐसा कोई काम नहीं है जो मैं नहीं कर सकता। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि हर सुबह मैं अपनी पूरी कोशिश करता हूँ कि मैं अपनी आत्मचाह को ईश्वर को सौंप दूँ और जो , उसकी इच्छा है उसे मानने के लिए तत्पर रहूँ। उनसे कहूँ कि वह मेरे द्वारा अपना काम करें। यह एक ऐसी प्रार्थना है जिसे ईश्वर कभी अस्वीकार नहीं कर सकता। जब मैं सुनहरे अवसरों को सजगता से देखता हूँ तो वे हर कोने में दिखाई देते हैं। मैं जितनी व्हिस्की के पेग चढ़ा सकता था उतने चढ़ाकर सो जाता था ताकि मेरे कुछ घंटे आराम से बीत जाएँ और उसके बाद पीने की यह प्रक्रिया दोबारा दोहराई जाए। पर आजकल यह जानकर कि मैंने ईश्वर के लिए कुछ काम किया है, मुझे गहरी नींद आ जाती है। अगर वह दिन संतोषजनक नहीं हुआ तो मैं नहीं जानता कि कि उससे ज्यादा और संतोषजनक क्या होगा।

अब मैं कॉलेज के छात्रों के साथ डुलुथ , एम में आदमी और औरतों की आरोग्य प्राप्ति कार्यक्रम में काम करता हूँ। वैसे आदमी और औरत , जिन्होंने हाल ही में संयम पाया है और जो अपने जीवन को सुधारना चाहते हैं , वह सबकुछ पाना चाहते हैं जो कि नशे की लत के कारण उन्होंने खो दिया था और उन सब सब सुखद अप्रत्याशित आशीर्वाद का अनुभव करना चाहते हैं जो ईश्वर ने उनके सामने रखा है।

 मेरा एक सवाल है …
 परमेश्वर के साथ एक रिश्ता शुरू कैसे किया जाए

( 1 ) फिलिप्पियों 4 : 8 , 9